! " मी शिवप्रेमी आणि निसर्ग प्रेमी बीजे " !

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Friday, 3 October 2014

! " रावन दहन " !

रावन दहन

हर साल मुझे जलाते हो ।
पर तुम खुद ये जानते हो मानते हो ।
मै नही जलता
इस लिऎ तो तुम मुझे हर साल जालाते हो
मै पुतले मे नही तुम मे रहता हुं ।
भ्रष्टाचार काला धन रिशवत की तुम करो लाख बुराई
पर तुमको रहता अफसोश कि तुमको अवसर क्यो नही मिला
अवसर मिला तो तुम सबसे आगे ।
मेरे पुतले को क्या जलाते हो
जलाना है तो अपनी बुराई को जलाये ।

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